इल्म-ए-जफ़र: एक तआरुफ़
हुरूफ़ और अदद के क्लासिकी इल्म और रूहानी रिवायत में उसकी जगह का तआरुफ़।
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इस्तिख़ारा एक सुन्नत है जिसके ज़रिए मोमिन अल्लाह से बेहतरी तलब करता है। इसे हर जायज़ काम के लिए किया जा सकता है।
इस्तिख़ारा के बाद जिस तरफ़ दिल माइल हो वह फ़ैसला करें और अल्लाह पर भरोसा रखें। ख़्वाब आना ज़रूरी नहीं।
हुरूफ़ और अदद के क्लासिकी इल्म और रूहानी रिवायत में उसकी जगह का तआरुफ़।
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