**बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम**
# हमारी सेवाएँ
**जहाँ रूहानियत इल्म से मिलती है, और यक़ीन तहक़ीक़ से ज़हूर पाता है।**
### 1. इल्म-ए-जफ़र अख़बार
इल्म-ए-जफ़र अख़बार हुरूफ़ और अ‘दाद के असरार पर आधारित वह इल्म है, जिसके ज़रिए मख़फ़ी हक़ायक़, मुस्तक़बिल के आसार और रूहानी इशारात को समझा जाता है।
**इल्म-ए-जफ़र अख़बार के ज़रिए इस्तिख़ारा**
मुश्किल फ़ैसलों, रिश्तों या परेशानियों में बेहतर रास्ता मालूम करने के लिए।
**तअल्लुक़ात, तक़दीर और कारोबार के हवाले से पेशीनगोई**
कारोबार में फ़ायदा व नुक़सान मालूम करना और रमूज़ व हुरूफ़ से हासिल होने वाले अ‘दाद की रोशनी में हालात व मुस्तक़बिल का जायज़ा लेना।
### 2. इल्म-उन-नुजूम
इल्म-उन-नुजूम वह फ़न है, जिसके ज़रिए इंसानी ज़िंदगी पर सय्यारगान की गर्दिश से पैदा होने वाले नेक व बद असरात को समझा जाता है।
यह इल्म अज्राम-ए-समावी की हरकात से इंसानी ज़िंदगी पर पड़ने वाले असरात को समझने का रूहानी और साइंसी ज़रिया है।
इंसान का इल्म महदूद होता है; उसे यह ख़बर नहीं होती कि आइंदा क्या होगा। फिर भी वह अपने मुस्तक़बिल को जानने के लिए बेचैन रहता है। वह यह जानना चाहता है कि उसकी ज़िंदगी का सफ़र कैसा गुज़रेगा, उसके नसीब में कैसे-कैसे उतार-चढ़ाव आएँगे, उसकी शादी कब और किस सूरत में होगी, औलाद कितनी होगी और उनका रवैया कैसा होगा, ख़ुशहाल ज़िंदगी के लिए उसे किस रास्ते का इंतिख़ाब करना चाहिए और उसकी सेहत व ज़िंदगी से जुड़े कौन-कौन से मामले पेश आ सकते हैं।
**सितारे झूठ नहीं बोलते — इनसे रहनुमाई लेना एक फ़न है।**
### 3. इल्म-ए-रमल
इल्म-ए-रमल एक क़दीम रूहानी इल्म है, जो ज़मीन पर बनने वाली अशकाल के ज़रिए राज़ अफ़शा करता है।
* फ़ौरी सवालात के जवाबात
* हालात-ए-ज़िंदगी और फ़ैसलों में रहनुमाई
* **रमल के नुक़्तों में पोशीदा है तक़दीर का नक़्शा**
### 4. इल्म-ए-जफ़र आसार व तिलिस्मात
इल्म-ए-जफ़र आसार व तिलिस्मात काइनाती तवानाइयों के मुनज़्ज़म इस्तेमाल का इल्म है, जिससे मख़सूस असरात पैदा किए जाते हैं।
* मुसबत तिलिस्म बराए रिज़्क़, मोहब्बत और कामयाबी
* मनफ़ी असरात का ख़ात्मा
* घर व कारोबार की बरकत के लिए आमाल
* तिलिस्म के ज़रिए तवानाई को अपना हमराज़ बनाना